Home
आलोक कुमार
alok
................................

December 2007
            1
2 3 4 5 6 7 8
9 10 11 12 13 14 15
16 17 18 19 20 21 22
23 24 25 26 27 28 29
30 31

Back July 25th, 2005 Forward
और बद्तमीज़ी

पठार ए सैकता में कुछ ही लोग हैं जो विण्डोज़ खालिस खरीदते हैं और बाकी सारे टोपो मारते हैं।

आज मैं भी उनमें शामिल हो गया, लेकिन इसके लिए पापड़ बेलने पड़े कितने।

ब्रिगेड रोड पर कुछ आधे घण्टे इन्तज़ार था तो एक साइबर कैफ़े में घुस गया, आज के हिस्से की स्पॅम से सुबह सुबह छुटकारा पाने के लिए।

वहाँ कुछ सीडियाँ भी दिखीं तो मैंने पूछ लिया कि ऍक्सपी सर्विस पॅक 2 है क्या? उसने कहा कि है, आठ हज़ार लगेंगे। मैंने कहा कि दिखा, तो बोला कि आधे घण्टे में ले आता हूँ, आप पैसे दे दो। मैं झट से पैसे निकाल के दे बैठा और उसके बाद ढक्कन ने पूरे एक घण्टे बिठाए रक्खा। पारा गर्म हो गया। लोग इन्तज़ार कर रहे थे, और मैं निकल के आ भी नहीं सकता था कि पैसे तो पहले ही थमा बैठा हूँ।

फिर उस बदतमीज़ को झाड़ लगाई लेकिन कोई असर थोड़ी होना था। सोचा होगा, ये दस रुपए का काम आठ हज़ार में करवाने वाला कौन आँख का अन्धा गाँठ का पूरा है, तो बस बैठ के मुस्कुराता रहा।

मैंने उसको और उसकी कौम को खूब चिल्ला के कहा कि ये सब काम इस मरियल शहर में कर रहे हो, अगर किसी ढङ्ग के शहर में करते तो अब तक तुम्हारी दुकान उठ चुकी होती।
पर जूँ थोड़ी रेंगनी थी।

अन्त में रो पिट के सीडी आ गई, मुझे पकड़ा दी, माफ़ी तक नहीं माँगी देरी के लिए।

तो पूरे किस्से में पारा मेरा गर्म हुआ, गालियाँ दुकान वाले ने खाईं (ब्रिगेड रोड पर लुई फ़िलिप के बगल से दाईं तरफ़ गली जाती है, उसमें तवा नामक भोजनालय के सामने पहली मञ्ज़िल पर है) और नोट छापे बिल्लू बादशाह ने। तभी तो वह हज़ार के नोट नीचे गिरने पर उठाने की ज़हमत नहीं करता है।


Why can't I see the Hindi section?

Current Mood: angry angry
Current Music: साथिया, तूने क्या किया
Back July 25th, 2005 Forward