पेल दिया नन्दन ने!
नन्दन ने सुना ही दिया।
नन्दन कह रहा है कि 1830 में चीन और भारत में दुनिया का आधा धन्धा चलता था। तो अब हम तुम्हारी वाट लगा रहे हैं तो कौन सी बड़ी बात है!
और भी बोला: इतने साल तक तुम हमें बोलते रहे कि अपनी दुकान खोलो, और अब खोल दी तो बन्द करने का राग अलाप रहे हो?
ये सब नीतियाँ वीतियाँ दिखावा ही होती हैं, अपना उल्लू सीधा करने के लिए। तो हम भी क्यों न करें?
लगे रहो बेटा!
पर मुझे लगता है ऍक्सेञ्चुर वगैरह ज़्यादा समय तक पीछे नहीं रहेंगी।
