ख़बर है, रीडिफ़ पे, और टाइम्स ऑफ़ इण्डिया में, कि नारायण मूर्ति ने बङ्गलोर अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा लिमिटेड से इस्तीफ़ा दे दिया है।
कारण? भूतपूर्व प्रधानमन्त्री देव गौडा का ये इल्ज़ाम कि इन्होंने इस हवाई अड्डे के लिए कुछ नहीं किया। वैसे नारायण मूर्ति काफ़ी ठण्डे दिमाग से काम करने वाले व्यक्ति माने जाते हैं लेकिन हरेक की सहन शक्ति की एक सीमा होती है।
यह सर्वविदित है कि बङ्गलोर में अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा बनाने के बारे में बहुत ही पहले सोचने वाले मूर्ति जी ही थे, उस समय जब किसी को गुमान भी नहीं था कि यह शहर इतनी तेज़ी से इतना बड़ा हो जाएगा।
अभी इसी हफ़्ते ही ख़बर है कि ब्रिटिश एयर्वेज़ रोज़ बङ्गलोर से उड़ान भरेगी, एयर फ़्रांस ने भी यही कहा है। लुफ़्थांसा तो पहले ही चल रही है, और थाई भी।
जितनी देर होगी उतना ही नुकसान व्यवसाय को होगा।
पर उस सब से अधिक कोफ़्त इस बात की है कि लोग बाग इस बात का फ़ायदा उठा रहे हैं कि अब बङ्गलोर में विकास असमान रूप से हो रहा है, या यूँ कहें कि शहर के और राज्य के कुछ हिस्से, दूसरों के मुकाबले अधिक तेज़ी से विकसित हो रहे हैं, इसलिए एक फ़र्क है, लोगों के नज़रियों में। इस समय सोचना यह चाहिए कि किसी तरह ऊपर पहुँचे लोग, नीचे वालों को भी ऊपर खींच सकते हैं, इसलिए उन्हें और ऊपर उठने दिया जाय, न कि ये कि नीचे वालों को भड़का के सब गुड़ गोबर किया जाए।
पर इतनी अकल होती तो इण्डिया तरक्की न कर लेता?
ये हैं इस नामौजूद हवाई अड्डे की कुछ तस्वीरें।
