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आलोक कुमार
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December 2007
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गौडा की बात समझें

अब, सवाल ये है कि गौडा के नज़रिए को समझना ज़रूरी है या नहीं?

एक तरह से देखेंगे तो बङ्गलोर में आम जनता - जिसका सूचना तकनीक से कोई वास्ता नहीं है - अभी बेहतर हालत में है, या पन्द्रह साल पहले, 1990 में थी?

इतना निश्चित है कि कोई भी बदलाव आएगा तो कुछ लोग फलेंगे फूलेंगे और कुछ दूसरे लोग पिसेंगे।

सवाल ये है कि कुल मिला के क्या आम जनता की हालत पहले से बेहतर है कि खराब? मुझे नहीं लगता कि पहले से खराब है।

लेकिन, क्या इन बदलावों की वजह से कुछ अन्य क्षेत्रों में विकास की दर धीमी करनी पड़ी? मैं कह नहीं सकता। अर्थात्, क्या हवाई अड्डा बनाने के चक्कर में किसी ग्रामीण क्षेत्र के विकास के बजट पर आँच आई? हवाई अड्डा तो केवल उदाहरण ही है, सवाल ये है कि केवल शहरी और एक उद्योग विशेष के विकास की वजह से बाकियों का ह्रास हुआ है क्या?

इस उद्योग में काम करने वालों को इस दृष्ठि से मुद्दो को देखना होगा, न कि नेता बनाम कर्मठ निजी कम्पनी वाले नज़रिए से।

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