रेडियो सिटी - चाटू
अब जब दिन में तीन घण्टे बस में बैठना ही है तो रेडियो सुनने के अलावा कोई खास चारा नहीं रहता है। लेकिन देख रहा हूँ की रेडियो सिटी बहुत चाटू होता जा रहा है। रोज वही घिसे पिटे जोशीले सूत्रधार, वही विज्ञापन। कोई और चैनल खोजने की कोशिश की तो विविध भारती मिली जो कि आधी कन्नड़ आधी हिन्दी है, कोई ख़ास दिलचस्प सामान नहीं मिला। सोच रहा हूँ अब अपने फ़ोन में कुछ ईबुक डाल लूँ ताकि तीन घण्टे का सफ़र अच्छे से गुज़र जाए।
