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आलोक कुमार
alok
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December 2007
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लाइवजर्नल रूसी कंपनी ने खरीदी

लाइवजर्नल, जिसपर यह लेखा आतिथ्यित है, एक समय पर कुछ लोगों द्वारा शुरू की गई कंपनी थी, उसके बाद इसे सिक्स अपार्ट ने खरीद लिया। इसके चलते काफ़ी चीज़ें जो प्रयोक्ताओं की इच्छा के अनुसार होती थीं, अब कंपनी की इच्छानुसार होने लगीं, उदाहरण के लिए नई भाषाओं में अनुवाद बंद हो गए - शुक्र है हिन्दी पहले ही शामिल हो गई थी - और असक्रिय अनुवादकों को हटाने में भी कड़ाई बरतना शुरू हुआ।
अब एक और बदलाव है कि सिक्स अपार्ट लाइवजर्नल को एक रूसी कंपनी खरीद रही है। पहले ही बहुत परेशान प्रयोक्ताओं की भड़ास देखी जा सकती है टिप्पणियों के २२ पन्नों से, जब तक आप पढ़ रहे हों शायद और भी बढ़ जाएँ। जितनी जटिल प्रणाली हो, बदलाव करना उतना ही जटिल और कष्टदायक है!

Current Location: चंडीगढ़
Current Mood: देखते हैं
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