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आलोक कुमार
alok
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December 2007
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आलोक कुमार [userpic]
बङ्गलोर, बम्बई हुआ

(1) दफ़्तर जाने में लगा समय: 1 घण्टा
(2) वापस आने में लगा समय: 2 घण्टा
18 किलोमीटर जाने आने के लिए आमची मुम्बई में ही इससे एक घण्टा तो कम लगेगा।

तो क्यों आया मैं मुम्बई छोड़ के बङ्गलोर?

1999 में दफ़्तर जाने आने में कुल मिला के एक घण्टा लगता था। वह भी पैदल।
2001 में बीस मिनट। कार से।
2003 में डेढ़ घण्टा - दफ़्तर दूर हो गया था।
2005 में तीन घण्टा।
2007 में?

Comments

हैलीकाप्टर सर्विस शुरु हो जायेगी तब तक, काहे चिन्ता करते हो?
वैसे मै तो अभी भी मानता हूँ, साइकिल सबसे अच्छा वाहन है, बशर्ते साइकिल का अलग ट्रैक हो, जापान मे तो लोग यही करते है,दूरदराज से आने वाले,गाड़ी मे एक साइकिल जरुर रखते है, जहाँ पंगा हो, लगाई गाड़ी किनारे और निकाली साइकिल,बस हो गया समाधान ट्रैफ़िक का।

(Anonymous)
Sheher badal do

The larger issue is that other cities in India need to pick up on IT jobs. The onus lies on larger software firms like TCS / Infosys to start exploring other cities like Maysore, Goa, Baroda, Indore, Bhopal for establishing their development offices. With the cost reduction and resource availability of these cities i fail to see why this has not been approached yet.

(Anonymous)
बङ्गलोर, बम्बई हुआ

1. शायद अतुल की एचओवी लेन पुकार रही हो। :-)
2. क्या मुंबई को बंबई कहना सही है?
3. पठार-ए-सैकता क्या होता है? नारद पर यही शीर्षक दिखाता है, पर यहाँ नहीं।
- रमण कौल

Re: बङ्गलोर, बम्बई हुआ

पठार-ए-सैकता क्या होता है?