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आलोक कुमार
alok
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December 2007
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आलोक कुमार [userpic]
पठार-ए-सैकता में महिला दिवस

मेरी कम्पनी वाले आज महिला दिवस मना रहे हैं।
अचानक क्या चक्कर है?
बाहर शामियाना लगा है, लोग महिलाओं के बारे में सूक्तियाँ बाँच रहे हैं।
चक्कर क्या है?
चक्कर घूम फिर कर वहीं आता है -
दादा बड़ा न भइया, सबसे बड़ा रुपइया।

महिलाएँ अक्सर दफ़्तर की हालातों और घर की परेशानियों से जूझते हुए बहुत कुछ सीख कर, काम कर के, अन्ततः थक हार के सब कुछ छोड़ छाड़ देती हैं।
तो अपनी अठन्नियाँ बचाने के लिए अपनी कम्पनियों ने रेवड़ी आवण्टन अभियान शुरू कर दिया है।
बस, और कुछ नहीं।