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आलोक कुमार
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बङ्गलोर बनाम शेष भारत

मु्द्दा शेष भारत बङ्गलोर
फ़ुटपाथ क्या होता है? दुकान, मन्दिर, बूट पॉलिश की जगह टू व्हीलर के लिए रास्ता
ऑटो का ईंधन पेट्रोल या ऍलपीजी केरोसीन
पेट्रोल कहाँ से भराएँ पेट्रोल पम्प से पेट्रोल बङ्क से या गैस स्टेशन से
पुलिस वाले गाड़ी कैसे रोकते हैं हाथ दिखा के गाड़ी के सामने खड़े हो के
ट्रैफ़िक पुलिस को रिश्वत सौ रुपए सौ रुपए, आईटी में हो तो दो सौ
जानी दुश्मन पाकिस्तान तमिलनाडु
सबसे ज़्यादा नफ़रत किससे परवेज़ मुशर्रफ़ देव गौडा
समय बिताने के लिए सौरभ को क्यों निकाला / नेताओं में भ्रष्टाचार सड़कों के गड्ढे गिनना
अखबार की पहले पन्ने पर खबर संसद सदस्यों का भण्डाफोड़ नारायण मूर्ति जिस सड़क से गया उसमें कितने गड्ढे थे
अखबारों के सम्पादकीय गांगुली को निकालना चाहिए क्या? पब ग्यारह बजे बन्द क्यों हो जाते हैं?
अङ्ग्रेज़ी बोलने का लहज़ा देसी/इलाकाई कैलिफ़ोर्नियन/न्यू यॉर्की
भाषाएँ हिन्दी, अङ्ग्रेज़ी, क्षेत्रीय पृथ्वी पर बोली जाने वाली सारी भाषाएँ
ट्रैफ़िक जैम का कारक गाय भैंस पुल निर्माण, वीआईपियों का इन्फ़ोसिस में आना
ज़मीन पर कब्ज़ा करने वाले माफ़िया, गुण्डे आई टी कम्पनियाँ
ऐतिहासिक स्थल किले, दुर्ग, मीनारें अधबने पुल
सरकार से शिकायत आलसी, भ्रष्ट जालस्थल नहीं है, डाक बाउंस हो जाती है
जब परेशानी हो तो परेशानी है कुछ इशूज़ रिज़ॉल्व नहीं हो रहे
अठारह किलोमीटर सफ़र का समय अठारह मिनट से चौबीस मिनट पाव दिन से आधा दिन
न्यूनतम रकम जो ऑटोवाले को ज्ञात हो - राउण्ड ऑफ़ के लिए अठन्नी पाँच या दस रुपए
सुबह मिलने का समय आठ से नौ बजे टेन-टेन थर्टी?
मकान मालिक द्वारा लिया ऐड्वांस एक महीने का किराया दस महीने का किराया
शनिवार इतवार को क्या कर रहे हो रिश्तेदारों से मिलना, घर पर टीवी देखना घर बुक कराना है, देखने जा रहे हैं
क्षेत्रीय भाषा में बात करने पर जवाब उसी भाषा में जवाब आई डोण्ट अण्डर्स्टैण्ड कन्नडा
साइबरकैफ़े कहाँ है? कैफ़े? अच्छा इण्टर्नेट? पता नहीं। दस कदम चलो तो चार मिलेंगे
साइबर कैफ़े में फ़ायर्फ़ाक्स चाहिए वो सब हमें नहीं पता पहले से ही है, नया वर्ज़न चाहिए तो डाउनलोड कर लो
सुबह नाश्ते का समय नौ बजे दुकानें खुलेंगी छः बजे से इडली दोसा सब कुछ मिलेगा
आई टी कम्पनी में काम करता हूँ अच्छा आप कम्प्यूटर बनाते हो? हाँ, पर कौन सी?
इन्फ़ोसिस में काम करता हूँ अच्छा, हमारे मामे का लड़के का साला भी है वहीं पर। आप जानते हैं? ओह। मैं भी। कौन सी बिल्डिङ्ग में हो?
जान पहचान बढ़ाना आपका घर कहाँ पर है? कागज़ पर लिख दीजिए आपका ईमेल ऍड्रेस क्या है? मेल करता हूँ।
पता बताना मकान नम्बर, ब्लॉक नम्बर, मुहल्ले का नाम पहले जयनगर आओ, वहाँ मन्दिर है, वहाँ से सीधे जा के दाएँ, फिर एक गली आएगी, वहाँ पीपल का पेड़ है, ...
फ़्रिज आज शाम को ही भिजवा देंगे होम डिलवरी मुफ़्त, साथ में कलैण्डर भी तीन दिन बाद आएगा, और बक्शीश माँगेगा (ट्रैफ़िक बहुत था न)
इस दुकान में सामान सस्ता है चलो यहीं चलते हैं कार्ड नहीं लेता यार। छोड़।
भारतीय मुद्रा रुपए बक्स

यार मेरा भी दर्द समझो

जयनगर में एक साइबर कैफ़े में बैठा हूँ और बगल में बैठा ढक्कन अपने रूममेट को फ़ोन पर ज़ोर ज़ोर से मुर्गी बनाना सिखा रहा है। हद होती है यार। वो भी हैऩ्ड्स फ़्री के साथ । यहाँ पर विऩ्डोज़ 98 है इसलिए लिखने के लिए http://devanaagarii.net/inscript</> का इस्तेमाल किया।

नारायण मूर्ति का हवाई अड्डे की समिति से इस्तीफ़ा

ख़बर है, रीडिफ़ पे, और टाइम्स ऑफ़ इण्डिया में, कि नारायण मूर्ति ने बङ्गलोर अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा लिमिटेड से इस्तीफ़ा दे दिया है।

कारण? भूतपूर्व प्रधानमन्त्री देव गौडा का ये इल्ज़ाम कि इन्होंने इस हवाई अड्डे के लिए कुछ नहीं किया। वैसे नारायण मूर्ति काफ़ी ठण्डे दिमाग से काम करने वाले व्यक्ति माने जाते हैं लेकिन हरेक की सहन शक्ति की एक सीमा होती है।

यह सर्वविदित है कि बङ्गलोर में अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा बनाने के बारे में बहुत ही पहले सोचने वाले मूर्ति जी ही थे, उस समय जब किसी को गुमान भी नहीं था कि यह शहर इतनी तेज़ी से इतना बड़ा हो जाएगा।

अभी इसी हफ़्ते ही ख़बर है कि ब्रिटिश एयर्वेज़ रोज़ बङ्गलोर से उड़ान भरेगी, एयर फ़्रांस ने भी यही कहा है। लुफ़्थांसा तो पहले ही चल रही है, और थाई भी।

जितनी देर होगी उतना ही नुकसान व्यवसाय को होगा।

पर उस सब से अधिक कोफ़्त इस बात की है कि लोग बाग इस बात का फ़ायदा उठा रहे हैं कि अब बङ्गलोर में विकास असमान रूप से हो रहा है, या यूँ कहें कि शहर के और राज्य के कुछ हिस्से, दूसरों के मुकाबले अधिक तेज़ी से विकसित हो रहे हैं, इसलिए एक फ़र्क है, लोगों के नज़रियों में। इस समय सोचना यह चाहिए कि किसी तरह ऊपर पहुँचे लोग, नीचे वालों को भी ऊपर खींच सकते हैं, इसलिए उन्हें और ऊपर उठने दिया जाय, न कि ये कि नीचे वालों को भड़का के सब गुड़ गोबर किया जाए।

पर इतनी अकल होती तो इण्डिया तरक्की न कर लेता?

ये हैं इस नामौजूद हवाई अड्डे की कुछ तस्वीरें

वर्जिश

चिट्ठों की दुनिया में वर्जिश का ज़ोर चल रहा है। और मेरा भी तीसरा दिन हो गया लगातार एक घण्टे चलने का। बड़ी बात है मेरे लिए। ठान लिया है कि गुलामी करने जाऊँगा तब जब कसरत हो जाएगी। नहीं तो क्या फ़ायदा? लफ़ड़ा है अग़र सुबह सुबह मीटिङ्ग हो। लेकिन सैया भए कोतवाल तो डर काहे का। देखते हैं बकरी की माँ कब तक खैर मनाती है। वैसे भी इस शहर में किसी से भी मिलने की बात करो तो यही होता हो, जो मेरे मुम्बई से आए एक दोस्त के साथ हुआ था।

दोस्त: आई वाण्ट टु कम टु सी युअर प्लेस सो दैट आई कॅन टेक इट फ़ॉर रेण्ट।
बङ्गलोरी: ओके, टुमॉरो यू कैन कम ऐनी टाइम। व्हेयर डू यू स्टे?
दोस्त: कलासीपाल्यम
बङ्गलोरी: ओके, कलासीपाल्यम टु कोरमङ्गला विल टेक यू सम हाफ़ ऍन आवर। (दो साल पुरानी बात है)
दोस्त: ओके, देन आई विल कम टु युअर प्लेस ऍट एट ओ क्लॉक।
बङ्गलोरी: एट ओ क्लॉक! नो नो। इट्स टू अर्ली। यू कम बाई टेन - टेन-थर्टी।
दोस्त: (आँय। अच्छा है तू मुम्बई में नहीं रहता वरना तेरी पहले दिन ही वाट लग जाती) ओके। आई विल कम ऍट टेन ओ क्लॉक।

तो यहाँ 10-10:30 के पहले न कोई दुकान खुलती है न कोई काम के लिए किसीसे मिलने जाता है। और ऐसा भी नहीं कि लोग देर रात तक काम करते हों। रात में भी 10-10:30 तक घोड़े बिक जाते हैं।

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Current Mood: awake
Current Music: आहिस्ता, आहिस्ता
ये हुई न बात

इसे कहते हैं काम। पठार-ए-सैकता के डॉलर दक्षिणाकाङ्क्षी पुजारियों, डूब मरो। इतना तो तुम लोग अपने वीकेण्ड्स में करने की औकात रखते हो न।

खबर मिली शशि सिंह से।

Current Mood: embarrassed embarrassed
Current Music: जो कुछ कहा था मैंने वो कर दिखाया ना
मोहल्ले में हल्ला

आजकल मोहल्ले में हल्ला चल रहा है।

जब मुनीम अपने आपको सेठ समझने लगे तो ऐसा ही होता है।

Current Mood: crushed crushed
Current Music: ये तो होना ही था
और बद्तमीज़ी

पठार ए सैकता में कुछ ही लोग हैं जो विण्डोज़ खालिस खरीदते हैं और बाकी सारे टोपो मारते हैं।

आज मैं भी उनमें शामिल हो गया, लेकिन इसके लिए पापड़ बेलने पड़े कितने।

ब्रिगेड रोड पर कुछ आधे घण्टे इन्तज़ार था तो एक साइबर कैफ़े में घुस गया, आज के हिस्से की स्पॅम से सुबह सुबह छुटकारा पाने के लिए।

वहाँ कुछ सीडियाँ भी दिखीं तो मैंने पूछ लिया कि ऍक्सपी सर्विस पॅक 2 है क्या? उसने कहा कि है, आठ हज़ार लगेंगे। मैंने कहा कि दिखा, तो बोला कि आधे घण्टे में ले आता हूँ, आप पैसे दे दो। मैं झट से पैसे निकाल के दे बैठा और उसके बाद ढक्कन ने पूरे एक घण्टे बिठाए रक्खा। पारा गर्म हो गया। लोग इन्तज़ार कर रहे थे, और मैं निकल के आ भी नहीं सकता था कि पैसे तो पहले ही थमा बैठा हूँ।

फिर उस बदतमीज़ को झाड़ लगाई लेकिन कोई असर थोड़ी होना था। सोचा होगा, ये दस रुपए का काम आठ हज़ार में करवाने वाला कौन आँख का अन्धा गाँठ का पूरा है, तो बस बैठ के मुस्कुराता रहा।

मैंने उसको और उसकी कौम को खूब चिल्ला के कहा कि ये सब काम इस मरियल शहर में कर रहे हो, अगर किसी ढङ्ग के शहर में करते तो अब तक तुम्हारी दुकान उठ चुकी होती।
पर जूँ थोड़ी रेंगनी थी।

अन्त में रो पिट के सीडी आ गई, मुझे पकड़ा दी, माफ़ी तक नहीं माँगी देरी के लिए।

तो पूरे किस्से में पारा मेरा गर्म हुआ, गालियाँ दुकान वाले ने खाईं (ब्रिगेड रोड पर लुई फ़िलिप के बगल से दाईं तरफ़ गली जाती है, उसमें तवा नामक भोजनालय के सामने पहली मञ्ज़िल पर है) और नोट छापे बिल्लू बादशाह ने। तभी तो वह हज़ार के नोट नीचे गिरने पर उठाने की ज़हमत नहीं करता है।


Why can't I see the Hindi section?

Current Mood: angry angry
Current Music: साथिया, तूने क्या किया
तार बेतार, हाल बेहाल

पता लगा कि ब्रोडबैण्ड मेरे घर में लग ही नहीं सकता क्योंकि हमारा फ़ोन कनेक्शन फ़ाइबर ऑप्टिक से है, उसके लिए फ़ोन कम्पनी वालों को कुछ और उपकरण लगाने पड़ेंगे। तो फिर इतने गड्ढे काहे खोदे थे भइया? और वह भी पिछले दो सालों से।

लगता है गड़ा धन खोज रहे थे।

अब कह रहे हैं कि दो महीने लग जाएँगे।

अब हालत यह है कि दफ़्तर में ही अन्तर्जाल पर सभी ग़लत, ग़ैर-क़ानूनी और ऊलजुलूल काम करने पड़ते हैं, क्योंकि घर पर तो टाँय टाँय फ़िस्स है। पर उसमें कोई नई बात थोड़े ही है। बहती कावेरी में हाथ धोना पठार-ए-सैकता के शाही बाशिन्दों के लिए आम बात है, इसमें उन्हें न शर्म आती है न झिझक। बेटा अग़र किसी दिन बॉस ने मेरे लॉगिन के ऍक्सेस लॉग्स देख लिए तो वाट लग जाएगी, मुन्ना भाई भी नहीं बचा पाएगा।

लेकिन ग़लती मेरी थोड़ी है, या तो बेङ्गलूरु महानगर पालिका की है, या बी ऍस ऍन ऍल की है।

सिलिकॉन वॅली का डायलप भी यहाँ के ब्रोड्बॅण्ड को मात देता है। एक बार पकड़ ले तो बिना टूटे अट्ठारह घण्टे चले, यहाँ अट्ठारह सेकिण्ड में टें बोल जाती है। अब मैं घर जा के क्वालिटी टाइम कैसे स्पेण्ड करूँ? दफ़्तर में ही रुकना पड़ेगा न?

Why can't I see the Hindi section?

Current Mood: devious devious
Current Music: सैया भए कोतवाल तो डर काहे का
बदतमीज़ लोग, ढक्कन लोग

पठार-ए-सैकता के बाशिन्दे जब सिलिकॉन वॅली पहुँच जाते हैं तो शराफ़त के पुतले हो जाते हैं, और अपने घर में महा बद्तमीज़।

आज दफ़्तर में एक दरवाज़ें को पार करना था, यहाँ के सभी दफ़्तरों की तरह यहाँ भी दरवाज़ें काँच के हैं, यानी कि आप देख सकते हैं कि दूसरी तरफ़ से कौन आ रहा है। मैं बाहर जा रहा था और बद्तमीज़ महाशय अन्दर। दो पल्लों का दरवाज़ा। महाशय ने देखा कि मैं दरवाज़े तक पहले पहुँच जाऊँगा, तो भाग के पहले पहुँच गए द्वार के निकट और मस्ती से पार हो लिए। यही महाशय सिलिकॉन वॅली में किसी गोरे या कहें गोरी को आते देखते तो भी दौड़ के दरवाज़ा तो लपकते, लेकिन खोलते अगले की तरफ़ वाला पल्ला, फ़िर किनारे हो के मुस्कुराते और मुझे - अर्थात् उस फ़िरङ्गी को पहले निकलने देते, साथ ही एक "हावर्यू डुइङ्ग?" भी चेंप देते भले ही पहले कभी उसकी शक्ल भी न देखी होती।

ख़ैर इस बुरे, कड़वे अनुभव के बाद जब अगला दरवाज़ा आया तो मैंने सोचा कि क्यों न मैं अच्छा उदाहरण पेश करूँ, तो जैसे ही मैंने पल्ला खोला तो उस तरफ़ वाले बन्दे पहले ही पासे हो गए कि इसने तो पहले ही लपक लिया। फ़िर भी मैं मुस्कुराया, और किनारे भी हुआ, लेकिन तब तक भी दूसरे तरफ़ वाले ढक्कन लोग भौंचक के भौचक्क ही थे। हताश हो के पहले खुद ही निकलना पड़ा।

गवाह चुस्त, मुद्दई सुस्त।


Why can't I see the Hindi section?

Current Mood: frustrated frustrated
Current Music: रात के बारह बजे
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